यूनी मेनाखिम ने जेरुस्लम सेन्टर फार पब्लिक अफेयर्स में अपने लेख में लिखा है कि सीरिया व ईरान के साथ सैन्य समझौते पर हस्ताक्षर आशा के अनुरूप था और यह एसे समय में हुआ जब ईरान के नतंज़ परमाणु प्रतिष्ठान में धमाका हुआ और अमरीका ने सीरिया पर अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए इसके साथ ही अमरीका ने सीरिया की मदद करने वालों पर भी प्रतिबंध लगाने की घोषणा की जिसकी वजह से सीरिया और तेहरान के बीच सहयोग बढ़ गया और इस सहयोग पर तेल अबीब निकट से नज़र रखे है।
अरब जगत के विशेषज्ञ पूर्व इस्राईली सैन्य अधिकारी बेन मेनाख़िम ने लिखा है कि ईरान और सीरिया के बीच होने वाले समझौते का महत्वपूर्ण भाग, यह है कि ईरान, सीरिया को अपना वह एयर डिफेंस सिस्टम देगा जो रूस के एस 300 एन्टी मिसाइल सिस्टम की तरह है और इसी तरह एक और एयर डिफेंस सिस्टम देगा जिसकी मदद से ईरान ने सन 2019 में अमरीका का ड्रोन विमान मार गिराया था। यह इस लिए था क्योंकि रूस ने सीरिया को इस्राईल के खिलाफ एस-300 एन्टी मिसाइल इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी इसी लिए ईरान ने इस्राईल को जवाब देने के लिए यह रास्ता अपनाया है।
बेन मेनाख़िम ने बताया है कि सीरिया और ईरान सैन्य समझौता करके वास्तव में अमरीका और इस्राईल को यह संदेश दे रहे हैं कि ईरान, इस अरब देश में अपनी सैन्य छावनियां बनाता रहेगा और यह सैन्य सहयोग लंबा चलेगा और अमरीका का सीज़र कानून ईरान और सीरिया को अपनी योजनाएं लागू करने से नहीं रोक पाएगा इसी तरह इस समझौते का यह भी संदेश है कि ईरान सीरिया के साथ खड़ा रहेगा यहां तक कि जब उत्तरी सीरिया में तुर्की के खतरे की बात होगी तब भी।
इस इस्राईली अधिकारी के दावे के अनुसार नतन्ज़ में धमाके के बाद ईरान और सीरिया इलाक़े की स्थिति विस्फोटक करना चाहते हैं इसी तरह ईरान, सीरिया के रास्ते से इस्राईल पर हमला करने का इरादा रखता है।
इस्राईली सुरक्षा एजेन्सी शाबाक के पूर्व अधिकारी बेन मेनाख़िम ने सवाल किया है क्या रूस को सीरिया ने ईरान के साथ अपने समझौते का ब्योरा दिया है? क्योंकि इस समझौते से सीरिया में ईरान की उपस्थिति मज़बूत होगी और वह सीरियाई सेना का घटक बन जाएगा।
उन्होंने लिखा है कि अस्ल में राष्ट्रपति बश्शार असद पूरी तरह से मास्को पर भी भरोसा नहीं करना चाहते अब सीरिया में रूस और ईरान के बीच प्रतिस्पर्धा किसी से छुपी हुई नहीं है और बश्शार असद इस स्थिति से पूरा लाभ उठाना चाहते हैं!
इस्राईली अधिकारी ने लिखा है कि अमरीकी व इस्राईली खुफिया एजेन्सियों की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी, अमरीका में नवंबर से राष्ट्रपति चुनाव से पहले इस्राईल से बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि ट्रम्प या इस्राईल अमरीका की मदद से ठोस जवाब न दे पाएं।
बेन मेनाखिम ने अनुमान लगाया है कि ईरान इस्राईल के मूल भूत ढांचे पर साइबर अटैक कर सकता है, या विदेशों में इस्राईली व यहूदी हितों पर सशस्त्र हमले करा सकता है, या बगदाद में अमरीकी दूतावास या इराक़ की उन छावनियों पर राकेट फायर कर सकता है जहां अमरीकी सैनिक तैनात है, यार फिर सीरिया से इस्राईल पर मिसाइल दाग सकता है यार फिर ईरान के समर्थन संगठनों या हिज़्बुल्लाह द्वारा इस्राईल पर ड्रोन हमले करवा सकता है।
बेन मेनाखिम ने अपने लेख के अंत में लिखा है कि सब कुछ इस बात का प्रमाण है कि ईरान और सीरिया के बीच सैन्य समझौता, इस्राईल के लिए बेहद अहम है क्योंकि धुआं उठता है तो आग भी होती है, मतलब ईरान व सीरिया इलाक़े में तनाव चरम पर पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं। Q.A. साभार, रायुलयौम, लेख में कही गयी बातों से सहमत होना ज़रूरी नहीं।